आप अच्छे लगते हो-- लिप्सा कौर
#आप अच्छे लगते हो #
लिप्सा कौर
जाने क्यों अच्छे लगते हो तुम....
ना जानती हू, ना पहचानती हू...
बस इतना समझती हू !
कोइ ना कोइ रिश्ता जरूर होगा !
तभी तो मिले है हम !
हाँ समझती हू, ऊंचा सर है
तुम्हारा मुझसे !
तुम्हारा शांत सा चेहरा
मानो पूर्णिमा का शीतल चाँद हो...
तुम्हारी आँखे मानो जैसे नैनीताल की मोह ने वाली
प्रकृति की छाया हो !
तुम इतने बहुमुखी प्रतिभा
के धनी हो की ये तुम
खुद ही नहीं जानते.
ठीक हिरन के समान.
जिस प्रकार हिरण
अपनी नाभि से आने वाली सुगंध को स्वयं नहीं जनता ओर वह इधर उधर
निहारता फिरता है.
ठीक उसी तरह तुम हो
सच मे तुम बोहत अच्छे लगते हो...
---लिप्सा
समर्पित
@डॉ राजेश कुमार ठाकुर
लिप्सा कौर
जाने क्यों अच्छे लगते हो तुम....
ना जानती हू, ना पहचानती हू...
बस इतना समझती हू !
कोइ ना कोइ रिश्ता जरूर होगा !
तभी तो मिले है हम !
हाँ समझती हू, ऊंचा सर है
तुम्हारा मुझसे !
तुम्हारा शांत सा चेहरा
मानो पूर्णिमा का शीतल चाँद हो...
तुम्हारी आँखे मानो जैसे नैनीताल की मोह ने वाली
प्रकृति की छाया हो !
तुम इतने बहुमुखी प्रतिभा
के धनी हो की ये तुम
खुद ही नहीं जानते.
ठीक हिरन के समान.
जिस प्रकार हिरण
अपनी नाभि से आने वाली सुगंध को स्वयं नहीं जनता ओर वह इधर उधर
निहारता फिरता है.
ठीक उसी तरह तुम हो
सच मे तुम बोहत अच्छे लगते हो...
---लिप्सा
समर्पित
@डॉ राजेश कुमार ठाकुर
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