जीवन : वीरेंद्र कुमार

जीवन
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यह जीवन है बहता पानी।
पर हित को यह मिली जवानी।

सब कुछ तुझको दिया प्रभू ने।
दुनिया को क्या दिया है तूने।
बहुत कमा ली तू ने दौलत।
नेक काम को पायी मुहलत।

कितनी दौलत और कमानी?
क्या इसमें ही उमर गँवानी?

दुनिया तूने लूटी जमकर।
दर जाना है तुझको यम के।
कर्मों का फल तुझे भोगना।
धर्म करो बस और ढोंग ना।

सुन अंतस् की अब तो वानी।
यह दुनिया है आनी-जानी।

चूसा कितना अब रहने दो।
दीनों को अब तो जीने दो।
धर्म-कर्म से नाता जोड़ो।
और पाप का खाना छोड़ो।

एक दिन दुनिया तज कर जानी।
छोड़ो अब तो अकड़ दिखानी।

         वीरेंद्र कुमार

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